गुरुग्राम में शहर की सरकार में लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। गुरुग्राम नगर निगम (MCG) में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए आगामी 30 अप्रैल की तारीख तय की गई है। प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई है, जिसके बाद शहर की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नगर निगम चुनाव होने के बावजूद इन दो महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति न होने के कारण कई विकास कार्य और प्रशासनिक फैसले लंबित थे। पहले यह चुनाव आपसी सहमति न बन पाने और राजनीतिक खींचतान के कारण कई बार टाला जा चुका था। अब जिला प्रशासन और चुनाव अधिकारियों ने मिलकर 30 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया संपन्न कराने का निर्णय लिया है। राजनीतिक दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
गुरुग्राम की राजनीति में इन पदों का विशेष महत्व माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के पास निगम में स्पष्ट बहुमत है, लेकिन पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच नामों को लेकर चल रही रस्साकशी ही चुनाव में देरी का मुख्य कारण मानी जा रही है। 30 अप्रैल को होने वाले इस चुनाव को न केवल स्थानीय निकाय की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है, बल्कि यह क्षेत्र के कद्दावर नेताओं के लिए भी अपनी ताकत दिखाने का मौका है। खासकर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर के समर्थकों की जीत मायने रखती है। चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
निगम कमिश्नर के मुताबिक 30 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए सभी पार्षदों को नोटिस जारी कर दिया गया है। मतदान प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न होगी। चुनाव अधिकारी की देखरेख में पार्षद अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और उसी दिन परिणामों की घोषणा होने की भी संभावना है। विकास कार्यों को मिलेगी गति
सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की नियुक्ति के बाद नगर निगम की फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी (FCC) जैसी महत्वपूर्ण समितियों द्वारा काम तेजी से शुरू किया जा सकेगा। इससे शहर के सफाई प्रबंधन, सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े उन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल सकेगी जो पिछले कई महीनों से फाइलों में दबे हुए थे। खेमाबंदी शुरू हो गई शहर के पार्षद अब अपने-अपने खेमे मजबूत करने में जुट गए हैं। क्या इस बार चुनाव निर्विरोध होगा या पार्षदों के बीच वोटिंग की नौबत आएगी, इस पर पूरे गुरुग्राम शहर की नजर टिकी है। हालांकि मानेसर नगर निगम के चुनाव में निर्दलियों के विरोध के चलते बीजेपी दोनों पदों पर कब्जा कर चुकी है।