चंडीगढ़ PGI टेक्नोलॉजिस्ट मौत SSP को जांच के आदेश:हाईकोर्ट पहुंचा मामला, बेड बॉक्स में मिला था शव,मौके से शराब की बोतलें और गिलास मिले

चंडीगढ़ पीजीआई के सीनियर टेक्नोलॉजिस्ट मुनीष कोचर की संदिग्ध मौत का मामला चार साल बाद भी अनसुलझा बना हुआ है। सेक्टर-24 स्थित सरकारी मकान में 1 अगस्त 2022 को उनका शव बेड बॉक्स के अंदर सड़ी-गली हालत में मिला था। अब परिवार ने एक बार फिर पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बताया है। मामले में दायर याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एसएसपी को जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि मुनीष के पिता द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो और अन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया जाए। आदेश के बाद परिवार को इंसाफ की उम्मीद जगी है। बेड बॉक्स से मिली थी लाश
44 वर्षीय मुनीष कोचर सेक्टर-24 के सरकारी मकान में अकेले रहते थे। परिवार के अनुसार 30 जुलाई 2022 के बाद से उनका फोन बंद आ रहा था। 1 अगस्त की सुबह घर में खाना बनाने आने वाली महिला जब पहुंची तो घर का दरवाजा खुला मिला। घर के अंदर बेड बॉक्स से तेज बदबू आने पर गद्दा हटाया गया तो मुनीष का शव औंधे मुंह पड़ा मिला। शव बुरी तरह गल चुका था और पुलिस को बेड का हिस्सा तोड़कर शव बाहर निकालना पड़ा था। मौके से शराब की बोतलें और गिलास मिले
पुलिस को मौके से शराब की तीन बोतलें, दो कांच के गिलास और अन्य खाली बोतलें मिली थीं। फॉरेंसिक जांच में इनमें किसी तरह के फिंगरप्रिंट नहीं मिले। विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में ऐसा होना असामान्य माना जाता है। परिवार का आरोप है कि किसी ने जानबूझकर सबूत मिटाने की कोशिश की। उनका कहना है कि यदि कमरे में शराब पी गई थी तो बोतलों और गिलासों पर फिंगरप्रिंट मिलना चाहिए था।
परिजनों के अनुसार मुनीष के मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट डिलीट मिली थी। उनका पर्स और दो हार्ड डिस्क भी गायब थीं। परिवार ने दावा किया कि मुनीष के खाते से एक महिला के अकाउंट में करीब 3.60 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। शादी करना चाहता था मुनीष
मुनीष के पिता रोशन लाल कोचर, जो रिटायर्ड इनकम टैक्स अधिकारी हैं, ने कहा कि उनका बेटा मानसिक तनाव में नहीं था। परिवार के मुताबिक वह घर में खाना बनाने आने वाली महिला से शादी करना चाहता था और भविष्य को लेकर खुश था। उन्होंने सवाल उठाया कि छह फुट लंबा व्यक्ति खुद बेड बॉक्स के अंदर जाकर ऊपर से गद्दा और चादर व्यवस्थित कैसे कर सकता है। परिवार का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि योजनाबद्ध हत्या का मामला है। रिश्वत केस में गिरफ्तार हुआ था जांच अधिकारी
मामले की शुरुआती जांच एएसआई वीरेंद्र सिंह कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें सीबीआई ने रिश्वत मामले में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद केस दूसरे अधिकारी को सौंपा गया। फिलहाल पुलिस ने मामले में पहले सीआरपीसी की धारा 174 के तहत कार्रवाई शुरू की थी, जबकि परिवार लगातार हत्या का केस दर्ज करने की मांग कर रहा है।

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