गर्मियों में तेज धूप, उमस और पसीने से स्किन पर खुजली, लाल दाने या रैशेज हो जाते हैं। लोग इसे हल्की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार ये हीट रैश यानी घमौरियां हो सकती हैं। स्किन पर स्वेट डक्ट्स होते हैं, जिनसे पसीना निकलता है। इनके ब्लॉक होने पर पसीना स्किन के अंदर ही फंस जाता है। इससे हीट रैश होता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हीट रैश की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हीट रैश क्या होता है? जवाब- हीट रैश एक कॉमन स्किन प्रॉब्लम है। यह ज्यादा गर्मी और पसीने की वजह से होता है। इसे ‘प्रिकली हीट’, ‘स्वेट रैश’ या ’मिलियारिया’ भी कहा जाता है। सवाल- हीट रैश क्यों होता है? जवाब- पसीने को स्किन की सरफेस तक पहुंचाने वाली डक्ट ब्लॉक होने पर हीट रैश होता है। इससे पसीना स्किन के अंदर जमा होने लगता है। यह दाने या रैशेज के रूप में बाहर निकलता है। ग्राफिक में इसके सभी कारण देखिए- सवाल- हीट रैश के क्या लक्षण हैं? जवाब- हीट रैश में स्किन पर छोटे-छोटे दाने निकलते हैं। ये गर्मी में असहजता बढ़ाते हैं। ग्राफिक में इसके सभी लक्षण देखिए- सवाल- हीट रैश और एलर्जी या फंगल इन्फेक्शन में क्या फर्क होता है? जवाब- हीट रैश, एलर्जी और फंगल इन्फेक्शन तीनों में स्किन पर दाने के साथ खुजली हो सकती है, लेकिन इनके कारण अलग होते हैं। तीनों को एक-एक करके समझते हैं- हीट रैश एलर्जी फंगल इन्फेक्शन सवाल- हीट रैश शरीर के किन हिस्सों में ज्यादा होता है? जवाब- यह उन हिस्सों में होता है, जहां हवा कम लगती है या स्किन आपस में रगड़ती है। खासकर वे हिस्से जो कपड़ों से ढके रहते हैं या जहां पसीना ज्यादा जमा होता है। ये बच्चों और वयस्कों में अलग अलग जगहों पर होता है- बच्चों में- वयस्कों में- इन हिस्सों में पसीना ज्यादा जमा होने से स्वेट डक्ट्स ब्लॉक हो जाते हैं। इससे हीट रैश होता है। सवाल- किन लोगों को हीट रैश का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों को हीट रैश का रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या टाइट कपड़े पहनने से हीट रैश बढ़ सकता है? जवाब- हां, टाइट कपड़ों से एयर फ्लो रुक जाता है। इससे स्किन तक हवा नहीं पहुंच पाती। इसके चलते पसीना ज्यादा होता है, देर से सूखता है। यही वजह है कि टाइट कपड़े पहनने से हीट रैश बढ़ जाता है। सवाल- क्या पर्सनल हाइजीन का ख्याल न रखने से भी हीट रैश बढ़ सकता है? जवाब- हां, अगर रोज नहीं नहाते हैं, पसीने से भीगे कपड़े लंबे समय तक पहने हुए हैं, साफ सफाई नहीं रखते हैं तो हीट रैश बढ़ सकता है। सवाल- क्या ओबिसिटी या अन्य हेल्थ कंडीशंस भी हीट रैश के रिस्क को बढ़ा सकती हैं? जवाब- हां, कुछ हेल्थ कंडीशंस हीट रैश होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं। पॉइंटर्स से समझिए- डायबिटीज ओबिसिटी स्किन कंडीशन सवाल- हीट रैश का घरेलू इलाज क्या है? जवाब- कुछ आसान घरेलू उपाय जलन, खुजली कम करने में मदद कर सकते हैं। जैसे- ठंडी पट्टी: प्रभावित हिस्से पर 5–10 मिनट तक ठंडे पानी में भीगे कपड़े की पट्टी रखें या बर्फ पर कपड़ा लपेटकर लगाएं। यह सूजन और खुजली कम करने में मदद कर सकता है। एलोवेरा: एलोवेरा जेल लगाने से स्किन को ठंडक मिलती है। इससे जलन व सूजन कम हो सकती है। खीरा: फ्रिज में रखी खीरे की स्लाइस प्रभावित जगह पर लगाएं। इससे स्किन को ठंडक मिलती है और जलन कम हो सकती है। चंदन पाउडर: चंदन पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाएं। इससे जलन और सूजन कम करने में मदद मिल सकती है। नीम: नीम के पत्तों का पेस्ट या नीम का तेल लगाएं। इससे स्किन को आराम मिलता है, क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। सवाल- कितने दिनों तक हीट रैश ठीक न हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए? जवाब- आमतौर पर हीट रैश 2-3 दिनों में ठीक हो जाते हैं। इन कंडीशंस में डॉक्टर से कंसल्ट करें- सवाल- गर्मियों में हीट रैश से बचाव के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- इन बातों का ध्यान रखकर हीट रैश से बचाव किया जा सकता है- गर्मी में होने वाला हीट रैश स्किन के ओवरहीट और केयर की कमी का संकेत है। थोड़ी सावधानी बरतकर इससे बचा जा सकता है। ………………… ये भी पढ़ें… जरूरत की खबर- गर्मियों में न खाएं ये 10 चीजें:डाइटीशियन से जानें इनके हेल्दी विकल्प, सादा और ताजा खाएं, लिक्विड डाइट पर जोर दें गर्मियों में शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं। इसलिए खानपान में भी बदलाव की जरूरत होती है। लेकिन लोग स्वाद के लिए अक्सर डीप फ्राइड और स्पाइसी फूड खाते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। ऐसे में फिट और एनर्जेटिक रहने के लिए यह जानना जरूरी है कि गर्मियों में क्या खाएं और क्या नहीं खाएं। पूरी खबर पढ़ें…