रूपनगर (रोपड़) में एक ही गांव के युवक और युवतियों के लव मैरिज करने पर पंचायत ने कड़ा रुख अपनाया है। उइंद गांव की पंचायत ने ऐसे विवाह करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने और उन्हें गांव से बाहर निकालने का फरमान जारी किया है। गांव के सरपंच के मुताबिक उनके गांव में पांच-छह केस ऐसे हो गए हैं। ऐसे में इसे देखते हुए ये फैसला लिया गया है। ये फरमान प्रदेश में कोई नया नहीं है। पहले भी कई पंचायतें ऐसे फरमान जारी कर चुकी हैं। 2025 से अब तक राज्य के 9 गांवों की पंचायतें बहिष्कार, गांव निकाला, साथ देने वालों का सोशल बायकॉट के प्रस्ताव पास कर चुकी हैं। वहीं, दूसरी तरफ कानून के जानकार पंचायतों के इस फैसले को असंवैधानिक बता रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायतें किसी को शादी करने से नहीं रोक सकती। यही नहीं पंचायतों के पास किसी का सोशल बायकॉट करने का भी अधिकारी नहीं है। अब पढ़िए पंचायत ने क्या कहा… एडवोकेट बोले- पंचायतों को नहीं कोई अधिकार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट कमलदीप सिद्धू का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शादी के लिए सभी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता है। पंचायत किसी को शादी करने से नहीं रोक सकती। पंचायत न्यायिक संस्था नहीं है। बहिष्कार या निकालने का आदेश भी कानूनन गलत है। इन गांवों अब तक प्रस्ताव पास हो चुका… *********** यह खबर भी पढ़ें… एक ही गांव में आपस में शादी बैन:अजनाला की पंचायत का फैसला- लव मैरिज करने वालों को बाहर करेंगे, सरकारी सुविधाएं रोकेंगे अमृतसर की अजनाला तहसील के धारीवाल में एक पंचायत ने लव मैरिज पर रोक लगा दी है। इसे लेकर पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया। सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि अगर गांव के कोई लड़का-लड़की आपस में मैरिज करते हैं तो उन्हें गांव से बाहर कर दिया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…