पठानकोट पहुंचे कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारूचक्क भावुक हो गए। दरअसल कटारूचक्क अपने पहले स्कूल में पहुंचे थे। जहां से उन्होंने अपनी शिक्षा का पहला पड़ाव यानि पहली कक्षा पास की। 53 साल बाद अपने स्कूल पहुंचे लालचंद कटारूचक्क ने पूरे मंदिर प्रांगण का दौरा किया और 1973 की यादों को ताजा किया। हालांकि, अब शाहपुर चौक स्थित वो स्कूल बंद हो चुका है और बाबा कैलाश गिरि मंदिर का निर्माण हो चुका है। लालचंद कटारूचक्क ने इस दौरान मंदिर के पुजारी चंद्रमोहन शर्मा से मुलाकात की और पुराने समय को याद किया। कटारूचक्क ने कहा कि मेरी भावनाएं इस जगह से जुड़ी हैं। वो घड़ियां-वो पल आज भी मेरी आंखों के सामने हैं। जब मैं इस स्कूल में पढ़ने आता था। 53 साल बाद स्कूल पहुंचे स्कूल
कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि वह इस जगह पर 53 साल बाद पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि आज जहां भोलेनाथ का मंदिर है, इसी प्रांगण में 1973 में सनातन स्कूल हुआ करता था। यहीं से मैने पहली कक्षा पास की। मैं रोजाना यहां पढ़ने आता था।
उन्होंने कहा कि आज यहां चंदन मोहन जी पुजारी हैं, इनकी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सेवा यहां रही है, पहले इनके पिताजी भी यहीं थे। मुझे आज भी याद है। 53 साल पहले मैं इस पवित्र जगह पर अपने अध्यापकों से पढ़ा था। पहले काजीपुर में ही रहते थे कैबिनेट मंत्री
कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि आज से 50 साल पहले वे अपने परिवार के साथ काजीपुर में बाउलियां इलाके में ही रहते थे। उसके पास यही स्कूल था। जिस लिए परिवार ने मुझे यहां पढ़ने के लिए भेजा। लेकिन, फिर ये सनातन स्कूल लमीनी में शिफ्ट हो गया। मैने एक साल ही इस स्कूल में पढ़ाई की। इस जगह के साथ जुड़े मेरे इमोशन
स्थानीय लोगों से बात करते कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस स्थान से मेरे इमोशन जुड़े हैं। बचपन की वो यादें, वो बच्चे (सहपाठी) जो अब पता नहीं कहां होंगे और शायद मेरी ही उम्र में होंगे। हमारे वो शिक्षक जो आज इस दुनिया में हैं, उनके चरणों में प्रणाम और जो इस दुनिया में नहीं रहे, उन्हें भी मेरा नमन है। मंत्री ने पुरानी यादें की ताजा
पुराने समय को याद करते मंत्री ने कहा कि आज 53 साल बाद यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। वो समय,वो घड़ियां और वो पल आज भी मेरी आंखों के सामने हैं। जब चार-पांच साल की उम्र में मैं यहां से पहली कक्षा पास करके गया था। इस जगह को भी मेरा नमन है। मेरे लिए भावुक कर देने वाला समय
मंत्री ने कहा कि बाबा भोलेनाथ के दरबार में आया हूं। कुल मिलाकर मेरे लिए यह बहुत ही भावुक कर देने वाला समय है। जीवन के 53 सालों बाद मुझे यहां आने का मौका मिला। मुझे खुद में बहुत गर्व और खुशी महसूस हो रही है कि मैं इस स्कूल में पढ़ा हूं।