मुझे डायबिटीज, ओवरी में सिस्ट और थायराइड की बीमारी है। 8 महीने से वेतन नहीं मिला। यह 9वां महीना है। इलाज तक के लिए पैसे नहीं हैं। पति मुकेश सिंह किसान हैं। चार बेटी और दो बेटे हैं। घर चलाना मुश्किल हो गया है।- कविता, आशा कार्यकर्ता, खगड़िया मेरी नसों में सूजन हो गया है। यूट्रस में भी प्रॉब्लम है। 8 महीने से पैसा नहीं मिला। इलाज तक नहीं करा पा रही हूं। पति खेती करते हैं, लेकिन खाने भर अनाज उगाने लायक भी जमीन नहीं है। दो बेटा और एक बेटी है। इन्हें पढ़ाई कराना मुश्किल हो गया है।- रीना, आशा कार्यकर्ता, बेगूसराय यह दर्द सिर्फ दो महिलाओं की नहीं। बिहार में करीब 1 लाख आशा कार्यकर्ता हैं। ये सरकारी हेल्थ सिस्टम की रीढ़ मानी जाती हैं। 8 महीने से वेतन और प्रोत्साहन की राशि नहीं मिली है। अब ये हड़ताल करने जा रहीं हैं। दूसरी ओर भूमि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की हड़ताल खत्म नहीं हुई है। सम्राट सरकार ने निलंबन वापस लिया, इसके बाद भी ये नहीं माने। सम्राट के पहले सख्त आदेश का पालन नहीं हुआ। दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में जानिए, आशा कार्यकर्ता क्यों हड़ताल करने जा रही हैं? उनकी मांगें क्या हैं? सस्पेंशन खत्म करने के बाद भी राजस्व कर्मियों ने क्यों हड़ताल खत्म नहीं किया है? 1 से 10 मई तक हड़ताल पर रहेंगी आशा कार्यकर्ता बिहार की नई सरकार कई तरफ से हड़ताल से घिर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में दिए अपने भाषण में सीओ ऑफिस को दुरुस्त करने की बात कही। उनका फोकस हेल्थ सिस्टम पर भी है, लेकिन सामने बड़ा चैलेंज है। वेतन नहीं मिलने से आशा कार्यकर्ताओं के लिए सर्वाइव करना मुश्किल है। उन्होंने 1 से 10 मई तक हड़ताल का ऐलान किया है। बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल PMCH की नर्सों ने हड़ताल की धमकी दी, लेकिन वार्ता के बाद फिलहाल इसे टाल दिया। हड़ताल के कारण अलग-अलग हैं, लेकिन नई सरकार में इस तरह से पहली चुनौती सामने है। इससे जनगणना का काम प्रभावित है। इसके साथ ही जमीन के दाखिल खारिज, जमीन की पैमाइश, रसीद कटाने जैसे काम पर बड़ा असर पड़ रहा है। आशा कार्यकर्ताओं का दर्द: पति नहीं रहे, बच्चों का पेट भरना तक मुश्किल मुंगेर के हवेली खड़गपुर के दरियापुर-वन पंचायत की आशा कार्यकर्ता किरण कुमारी ने कहा, ‘मेरे पति बिजली विभाग में काम करते थे। बिजली का झटका लगने से उनकी मौत हो गई। कई जगह आवेदन दिया, लेकिन मुआवजा नहीं मिला।’ उन्होंने कहा, ‘मैं आशा कार्यकर्ता के रूप में काम करती हूं। मेरा 2013 से पैसा बकाया है। 2018 से आवेदन दे रहे हैं। सभी डॉक्यूमेंट दे दिए, लेकिन पेमेंट नहीं हो रहा है। पैसा मांगने पर धमकी दी जाती है कि हटा देंगे।’ खगड़िया की कविता ने कहा, ‘मेरे पति मुकेश सिंह किसान हैं। चार बेटी और दो बेटे हैं। एक बेटी की शादी हुई है। बच्चों की पढ़ाई मुश्किल से हो पा रही है। 3 हजार रुपए राज्य-राशि के रूप में मिलते हैं। इसके अलावा टीकाकरण, जांच कराने आदि के लिए प्रोत्साहन राशि मिलती है। इन सब से जुड़ी राशि भी 9 माह से नहीं मिली है।’ आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटरों की 3 बड़ी मांगे आशा कार्यकर्ता अल्प वेतन भोगी हैं, कैसे परिवार चलाएंगी: शशि यादव बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ की अध्यक्ष और एमएलसी शशि यादव ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटर को 9 महीने से पैसा नहीं मिला है। ये अल्प वेतन भोगी हैं। इन्हें इतने लंबे समय से पैसा नहीं मिलेगा तो कैसे परिवार चलाएंगी।’ उन्होंने कहा, ‘17 अप्रैल को एक दिन की हड़ताल की गई तो एक-दो माह का पैसा भेजा गया। सदन में भी सवाल उठाया। यही दशा रही तो आशा कार्यकर्ताओं का घर कैसे चलेगा, इलाज कैसे होगा, पढ़ाई बाधित हो रही तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा?’ सम्राट सरकार ने रद्द किया निलंबन, नहीं माने राजस्व विभाग के कर्मी सीएम सम्राट चौधरी की सरकार ने भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के निलंबित कर्मियों का निलंबन वापस लिया है। इसके बाद भी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म नहीं किया है। बिहार राजस्व सेवा के 47 पदाधिकारी सस्पेंड और 900 हड़ताल पर हैं। इसके चलते अंचल कार्यालयों में कामकाज प्रभावित है। हमने हड़ताली अफसरों और कर्मचारियों से बात की। राजस्व सेवा के अफसरों ने उम्मीद जताई कि नई सरकार उनकी मांगें मानेगी और हड़ताल खत्म होगी। राजस्व सेवा के अफसरों की हड़ताल क्यों है? यूनाइटेड बिहार राजस्व सेवा संघ के अध्यक्ष आदित्य शिवम शंकर ने कहा, ‘बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010 के आधार पर DCLR (Deputy Collector Land Reform) का पद बना था। अब DCLR की जगह उसके समकक्ष ADLO (Assistant District Land Acquisition Officer) पद बना दिया गया है।’ ‘DCLR के समकक्ष ADLO पद बनाए जाने के खिलाफ हड़ताल चल रही है। पहले यह हड़ताल 2 फरवरी से 5 फरवरी तक चली। इसके बाद 9 मार्च से हड़ताल जारी है।’ अब इसे थोड़ा विस्तार से जानते हैं… राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं, सम्राट ने 224 का सस्पेंशन वापस लिया राजस्व अधिकारियों के अलावा राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं। पूर्व मंत्री विजय सिन्हा ने काम पर वापस नहीं लौटने वाले कर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया था। सम्राट चौधरी ने सीएम बनने के बाद विजय सिन्हा का आदेश पलटा और निलंबित किए गए 224 राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन वापस लिया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निलंबित कर्मियों की बहाली प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। निलंबन रद्द होने के बावजूद कर्मचारी संघ ने अपनी 17 सूत्री मांगों के लिए हड़ताल जारी रखने का फैसला लिया। भूमि सुधार कर्मचारी संघ के राज्य अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर चौबे ने कहा, ‘2 जून 2025 को संघ के साथ अपर मुख्य सचिव की उपस्थिति में समझौता हुआ था। 4 जुलाई 2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी के साथ भी निर्णय हुआ।’ उन्होंने कहा, ‘20 अप्रैल को सारा ध्यान सस्पेंशन खत्म करने पर केंद्रित कर दिया गया। हमारी कोशिश रही कि राजस्व कर्मचारी ज्वाइन कर लें, लेकिन अभी तक हड़ताल जारी है।’ विभागीय कार्यवाही अभी भी चला रही सरकार भूमि सुधार कर्मचारी संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार ने कहा, ‘हमने अपनी मांगों के साथ संसाधनों की कमी दूर करने की मांग भी रखी है। ऑन लाइन काम होता है पर सरकार ने न तो इंटरनेट की सुविधा दी, न मोबाइल दिया, न स्टेशनरी उपलब्ध कराया जाता है। दस्तावेज रखने के लिए अलमारी तक नहीं है।’ अभिषेक ने कहा, ‘क्षेत्र भ्रमण के लिए न तो वाहन दिया गया है और न इंधन। फर्निचर भी सरकार नहीं देती है। जनगणना का काम शुरू हो गया है। हमलोग जनगणना में जाना चाहते हैं, लेकिन विभाग ने कार्रवाई कर सभी जिला सचिव व जिला अध्यक्ष को निलंबित कर दिया है।’