पटना के राजा बाजार स्थित पारस अस्पताल में सोमवार को 9वीं के छात्रा की मौत हो गई। परिजन ने जमकर हंगामा किया। ICU बेड, वेंटिलेटर लेकर ही सड़क पर उतर गए और विरोध जताया। अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिसर में जमकर तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की। परिजन का कहना था कि बच्चा मर चुका था फिर भी उसे जिंदा बताकर अस्पताल ने पैसे ऐंठे। परिजन के मुताबिक, मृतक छात्रा विशाल के इलाज में 2 लाख रुपए खर्च हुए। परिवार ने कर्ज लेकर अस्पताल में पैसे जमा कराए, लेकिन इलाज सही से नहीं होने पर विशाल बच नहीं पाया। विशाल अपने घर का इकलौता बेटा था, पटना अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रहा था।…अब परिजन का कहना है, कर्ज के पैसे भी देने पड़ेंगे, घर का इकलौता चिराग भी बुझ गया। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए कैसे अस्पताल पहुंचा विशाल दरअसल, रविवार शाम महुआबाग में खेलने के दौरान लड़कों में किसी बात पर विवाद हो गया। इस विवाद में विशाल को रिटायर्ड दारोगा के बेटे ने बैट से सिर के पिछले हिस्से में मार दिया। इसके बाद वह बेहोश हो गया। बेहोशी के हालत में ननिहाल के परिजन ने विशाल को पटना के पारस अस्पताल में लगभग 5:30 बजे एडमिट कराया। विशाल के पिता ऋषि चौहान लुधियाना में मजदूरी करते हैं। विशाल बचपन से ही नानी घर रहता था। घर का इकलौता चिराग था विशाल मामी प्रियंका देवी ने बताया, विशाल महुआबाग के बीएमपी स्कूल टहल टोला में 9वीं क्लास का छात्र था। घर का इकलौता चिराग था। आर्थिक तंगी होने के बाद भी पटना के सबसे बड़े अस्पताल पारस में एडमिट कराया। ताकि उसकी जान बच जाए। आगे कहा, हमलोगों के पास रुपए भी नहीं थे। जैसे तैसे 10% के ब्याज पर 2 लाख का कर्ज लिए। अस्पताल पहुंचने के साथ ही काउंटर पर तकरीबन 1,35000 कैश जमा कराए। इलाज में ₹200000 खर्च हो गए, लेकिन जिस तरीके से इलाज होना चाहिए था, वह अस्पताल में नहीं हो पाया। यहां तक कि समय-समय पर डॉक्टर भी नहीं मौजूद थे। अस्पताल के डाटा में डेढ़ लाख जमा कराने का रिकॉर्ड अस्पताल की पर्ची के मुताबिक, मृतक विशाल को न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट में एडमिट कराया गया था। डॉक्टर अंबुज कुमार पेशेंट को देख रहे थे। एडमिशन डेट 26 अप्रैल शाम 6:45 बजे अंकित है। डॉक्टर अंबुज कुमार के हर विजिट के 1810 रुपये चार्ज लिए गए हैं। CBC के 963.90 रुपए, अस्पताल की ओर से एक दिन के जनरल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के नाम पर 4570 रुपए वसूले गए हैं। यहां तक की डाइट चार्ज के भी 650 रुपए लिए गए हैं। कुल मिलाकर करीब डेढ़ लाख के आसपास पैसे दिए गए। अस्पताल के बाहर हंगामें की 5 तस्वीरें… अब जानिए सिलसिलेवार कहानी… दरअसल, फुलवारी शरीफ के रहने वाले 15 साल के विशाल का क्रिकेट खेलने के दौरान दोस्तों संग विवाद हो गया था, उसके सिर पर बल्ले से मारा गया था। जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान सोमवार को उसकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि उनके बेटे को जिंदा बताकर लगातार पैसे वसूले जा रहे थे। यहां तक कि उन्होंने किडनी निकालने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर तोड़फोड़ की। कई शीशे तोड़ दिए गए, गमले फेंके गए और वहां खड़ी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी हुई है। क्रिकेट खेलने के दौरान दोस्त ने सिर पर बल्ला मारा परिजनों के मुताबिक, विशाल अपने परिवार का इकलौता बेटा था।रविवार शाम क्रिकेट खेलने के दौरान एक रिटायर्ड दारोगा के बेटे ने विशाल के सिर पर बैट से हमला कर दिया था, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। आरोप है कि उसे रातभर वेंटिलेटर पर रखा गया और किसी परिजन को मिलने नहीं दिया गया, जबकि करीब 2 लाख रुपए भी जमा करा लिए गए। परिजन का कहना है कि जब लगातार बेटे से मिलने नहीं दिया गया, तो सोमवार दोपहर उनका गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद वे ICU बेड और वेंटिलेटर के साथ ही बेटे का शव लेकर सड़क पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन किया। बेटे को जिंदा बताकर पैसे ऐंठते रहे डॉक्टर विशाल के नाना रामबालक चौधरी ने भी अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा, “बेटा मर चुका था, लेकिन डॉक्टर कहते रहे कि जिंदा है और पैसे ऐंठते रहे। कल से एक बार भी बेटे को देखने नहीं दिया गया। वहां हमलोगों को मारकर भगा दिया गया।” वहीं, मामा विकास ने बताया, “क्रिकेट खेलने के दौरान हुई मारपीट के बाद रविवार शाम उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि करीब 2 लाख रुपए ले लिए गए, लेकिन रातभर बच्चे का ठीक से इलाज नहीं किया गया। लगातार पैसे मांगे जा रहे थे, रोज 1-2 लाख रुपए की मांग की जा रही थी, हम कहां से लाते?” एक आरोपी को पुलिस ने पकड़ा है घटना के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन परिजनों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि पुलिस के सामने ही तोड़फोड़ जारी रही। फिलहाल पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी है और पूरे मामले की जांच की बात कही जा रही है। फुलवारी थानाध्यक्ष ने जानकारी दी है कि परिजन ने कल शाम प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसके तहत नामजद आरोपी (नाबालिग) को पकड़ा गया है, जो रिटायर्ड दारोगा का बेटा है। वहीं 3- 4 अन्य अज्ञात युवकों के ख़िलाफ़ छापेमारी जारी है।