दिल्ली में बिहारी कहकर मारे गए युवक की कहानी:3 साल पहले बहन की हत्या, पिता-छोटा भाई बीमार, गांव वाले बोले–ये पूरे बिहार की बेइज्ज्ती है

‘बिहारियों पर मजदूर होने का ठप्पा लगा है। पूरे देश के लोग हमें मजदूर की तरह ट्रीट करते हैं। हमें आज भी हर कोई गरीब ही मानता है। बिहारी कोई गाली नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और हौसले की पहचान है। हमें तिरस्कार नहीं, सम्मान मिलना चाहिए। दिल्ली में युवक की हत्या पूरे बिहार की बेइज्जती है।’ ये कहना है खगड़िया के रहने वाले छात्र निखिल कुमार का, जिनके गांव के रहने वाले पांडव कुमार को दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल ने गोली मार दी। पांडव 8 साल पहले गांव से दिल्ली गया था। यहां ससुराल में उसकी बहन की हत्या कर दी गई थी। परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर है। पांडव कुमार कौन है? किस वजह से उसकी हत्या की गई? इस घटना पर मृतक के गांववालों का क्या कहना है? इन सारे सवालों का जवाब जानने के लिए…पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले जानिए क्या है मामला, कौन है पांडव कुमार? पांडव कुमार बिहार के खगड़िया के गंगौर थाना क्षेत्र अंतर्गत तेताराबाद पंचायत के वार्ड संख्या-15 स्थित खड़गी तिरासी गांव का निवासी था। वो पिछले 8 साल से अपने परिवार के साथ दिल्ली की प्रजापति कॉलोनी, उत्तम नगर में रहता था। परिवार में पिता गणेश सिंह, मां, एक भाई विकास और शादीशुदा बहन है। पिता बीमार हैं। छोटा भाई टीबी से पीड़ित है। मां मजदूरी करके परिवार संभालती थीं। पांडव कुमार कुछ साल पहले यूट्यूब रिपोर्टर के तौर पर काम करता था। जब इससे उसके घर का खर्च नहीं चला तो उसने जोमैटो में डिलीवरी बॉय का काम करना शुरू कर दिया। शनिवार को इसके दोस्त रूपेश कुमार के दो साल के बेटे का जन्मदिन था। रूपेश कुमार जाफरपुर कलां में रहता है। पार्टी खत्म कर लौट रहे थे, कॉन्स्टेबल ने गोली मारी पांडव के दोस्त ने पुलिस को बताया, कई दोस्त रूपेश की जन्मदिन की पार्टी में मौजूद थे। देर रात पार्टी खत्म होने के बाद करीब 20 लोग गली से निकलकर मेन रावता रोड पर आ गए। इनमें कई महिलाएं और युवक मौजूद थे। कैब बुक करने के बाद कई लोग चले भी गए। सड़क पर एक बाइक पर पांडव, कृष्णा और दीपक थे। स्कूटी पर छोटू किशन मौजूद था। रात करीब 2 बजे रूपेश इनको छोड़ने के लिए वहां मौजूद था। इस बीच सामने रहने वाला हवलदार नीरज नशे में धुत होकर वहां पहुंचा। आते ही उसने भीड़ लगाने का कारण पूछा। इस बीच नीरज ने लड़कों से पूछा कि तुम लोग कहां के रहने वाले हो। जैसे ही पांडव ने बताया कि वह बिहार का रहने वाला है, उसने गाली-गलौज शुरू कर दी। इस बीच कॉन्स्टेबल ने पिस्टल निकालकर पहले पांडव के सिर पर रखी और बाद में सीने से सटाकर उस पर गोली चला दी। गोली पांडव के सीने को चीरती हुई ठीक उसके पीछे बैठे कृष्णा के पेट में जा लगी। बाद में आरोपी सभी लड़कों को धमकाता हुआ वहां से फरार हो गया। अस्पताल में पांडव को मृत घोषित कर दिया, कृष्णा का इलाज जारी है। गांव में हर चेहरे पर गुस्सा-दर्द था इस घटना के बाद भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 100 KM दूर पांडव कुमार के गांव पहुंची। गांव के सभी लोग पांडव के झोपड़ीनुमा के घर के आगे भीड़ लगाए खड़े थे। हर किसी के चेहरा गम और गुस्से से भरा था। सबसे पहले हमारी मुलाकात पांडव के ही गांव के रहने वाले निखिल कुमार से हुई। निखिल ने बताया, “मैं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा हूं। मुझे सोमवार की सुबह न्यूज से घटना की जानकारी मिली। मैं परेशान हो गया।” बिहार ने सिर्फ मजदूर नहीं इंजीनियर और साइंटिस्ट भी दिए निखिल ने बताया, “पूरे भारत में आज भी बिहारवासियों पर मजदूरी का एक गलत ठप्पा लगा दिया गया है। अक्सर ‘बिहारी’ शब्द को तिरस्कार की नजर से देखा जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि बिहारी होना किसी गाली का नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और हौसले की पहचान है। बिहार की धरती ने सिर्फ मजदूर ही नहीं दिए, बल्कि अफसर, शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, सैनिक, वैज्ञानिक और देश को दिशा देने वाले अनगिनत प्रतिभाशाली लोग भी दिए हैं। यह वही मिट्टी है जिसने हर क्षेत्र में देश को मजबूत किया है, लेकिन दुखद बात यह है कि आज भी कई लोग बिहार को सिर्फ मजदूर के नजरिए से देखते हैं। बिहार के लोग जहां भी जाते हैं, अपने सपनों को पूरा करने, परिवार का पेट पालने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए जाते हैं। वे अपनी मेहनत और ईमानदारी से हर शहर, हर राज्य और हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हैं। सबसे ज्यादा पीड़ा तब होती है, जब दिन-रात मेहनत करने वाले लोगों को सम्मान नहीं मिलता, और जब किसी इंसान को उसकी काबिलियत से नहीं, बल्कि उसके राज्य और पहचान के आधार पर आंका जाता है। बिहारवासियों ने हमेशा अपने पसीने से देश की तरक्की में योगदान दिया है, इसलिए उन्हें तिरस्कार नहीं, बल्कि सम्मान की नजर से देखा जाना चाहिए।” एक कमरे में रहता है पूरा परिवार वहीं, वार्ड सदस्य मंटू सिंह ने बताया, “उन्हें घटना की जानकारी रविवार की सुबह मिली। कुछ ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि गणेश के बेटे की दिल्ली में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। आरोप है कि पुलिस ने ‘बिहारी’ कहकर अपमानजनक टिप्पणी की और फिर गोली चला दी। यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय घटना है। हम सभी की मांग है कि पांडव कुमार को न्याय मिले और दोषी को कड़ी सजा दी जाए।” उन्होंने कहा कि मृतक का परिवार बेहद गरीब है। घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। परिवार के पास न पर्याप्त जमीन है और न ही आय का कोई स्थायी साधन है। घर में सिर्फ एक कमरा है, जिसमें पूरा परिवार रहता है। कचरा इक्ट्ठा कर हर दिन का चलता है खर्च पांडव कुमार का छोटा भाई टीबी बीमारी से जूझ रहा है और कमाने की स्थिति में नहीं है। माता-पिता बुजुर्ग हैं। पिता गणेश सिंह की उम्र करीब 60 साल बताई जा रही है, जबकि मां मीना देवी घरों में झाड़ू-पोछा कर और मजदूरी कर परिवार चलाने में सहयोग करती हैं। कभी-कभी कचरा बीनकर भी घर का खर्च चलाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पांडव कुमार करीब 8 साल पहले दिल्ली गया था। वहां डिलीवरी का काम शुरू किया था। परिवार को उम्मीद थी कि अब घर की हालत सुधरेगी, लेकिन उससे पहले ही उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। मंटू सिंह ने सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए। परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिले और आरोपी को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाई जाए। पांडव की हत्या बिहार के सम्मान से जुड़ा वहीं, तेतराबाद पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि रमेश चौधरी ने कहा, इस घटना से पूरा इलाका सदमे में है। यह घटना अब सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं रही, बल्कि पूरे बिहार के सम्मान से जुड़ा मामला बन गई है। रमेश चौधरी के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मी नशे की हालत में था। उसने पांडव और उसके साथियों से पूछा कि वे कौन हैं और यहां क्या कर रहे हो? जब पांडव ने बताया कि वे दोस्त के यहां जन्मदिन मनाने आए थे और अब वापस जा रहे हैं। इसपर आरोपी ने गाली-गलौज शुरू कर दी। उसने कथित तौर पर ‘बिहारी’ कहकर अपमानित किया और कहा कि तुम लोग यहां क्यों रहते हो, जल्दी निकलो। जब पांडव ने विरोध किया कि वह गाली क्यों दे रहे हैं, तब आरोपी ने धमकी दी कि मार भी देंगे। इसके बाद उसने गोली चला दी। रक्षक, भक्षक बन जाए, तो आम लोगों का विश्वास कैसे बचेगा? उन्होंने आगे बताया, गोली पांडव कुमार को लगी और उसके पीछे बैठे उसके दोस्त को भी घायल कर दिया। पांडव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घायल युवक को तुरंत दीनदयाल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। रमेश चौधरी ने कहा, इस घटना से सिर्फ गांव ही नहीं, पूरा जिला और पूरा बिहार मर्माहत है। अगर ‘बिहारी’ कहकर किसी युवक की हत्या की जाती है और वह भी कानून की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मी के हाथों, तो यह बेहद गंभीर मामला है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो आम लोगों का विश्वास कैसे बचेगा। 50 लाख रुपए का दिया जाए मुआवजा उन्होंने बिहार सरकार और दिल्ली सरकार से मांग की कि मृतक के परिवार को तत्काल 50 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। दोषी पुलिसकर्मी पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को ऐसा तंत्र बनाना चाहिए, जिससे देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले बिहारियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। पांडव के परिवार के पास न जमीन है, न पक्का घर। सरकारी योजनाओं का भी लाभ उन्हें नहीं मिल पाया। आवास योजना और शौचालय योजना से भी परिवार वंचित रह गया है। बड़ी बहन की ससुराल में दहेज के लिए कर दी गई हत्या पांडव की चाची रंजन ने बताया, तीन साल पहले इसकी बड़ी बहन की ससुरालवालों ने दहेज के लिए हत्या कर दी थी। पांडव का परिवार गरीब है, इस वजह से वो दहेज में लाख रुपए बेटी के ससुराल नहीं पहुंचा पाए। इस वजह से उसके ससुरालवालों ने गला दबाकर हत्या कर दी। बहन के बेटे को भी पांडव के परिवार वाले पाल रहे थे। 3-4 महीने पर आता था गांव पांडव कुमार की दादी परमिला देवी ने बताया, दो-चार महीने पर वो घर आता-जाता रहता था। दिल्ली में किराए के मकान में पूरा परिवार रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उनके पास न जमीन है और न कोई स्थायी आय का साधन। घर का खर्च किसी तरह पांडव की कमाई से चलता था। दादी ने रोते हुए कहा कि उनके पोते को ‘बिहारी’ कहकर गोली मार दी गई। उन्होंने सरकार से न्याय की मांग करते हुए कहा, दोषी पुलिसकर्मी पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बिहार में रोजगार नहीं इस वजह से जा रहे दिल्ली-पंजाब पड़ोस की रहने वाली सावित्री देवी ने कहा, बिहार में रोजगार की कमी के कारण यहां के लोग दिल्ली, पंजाब और दूसरे राज्यों में कमाने जाने को मजबूर हैं। अगर बिहार में ही काम-धंधा मिलता, तो किसी को अपना घर-परिवार छोड़कर बाहर नहीं जाना पड़ता। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, आज पांडव को मार दिया गया, कल किसी और गरीब के बेटे के साथ भी ऐसा हो सकता है। ऐसे माहौल में आम लोग कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे। उन्होंने कहा, चुनाव के समय नेता-मुख्यमंत्री हमारे पास हाथ जोड़कर वोट मांगने आते हैं, लेकिन जब किसी गरीब परिवार पर दुख टूटता है तो उनकी सुनने वाला कोई नहीं होता। गरीब आदमी की आवाज कोई नहीं सुनता। जिस परिवार का बेटा चला गया, वही उसके दर्द को समझ सकता है। दिल्ली की घटना पर बिहार में सियासत दिल्ली की इस घटना पर अब बिहार में सियासत शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मजदूर की मौत पर शोक जताते हुए इसे दुखद बताया है। उन्होंने मृतक के परिजनों को आठ लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया। वही मामले में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पप्पू यादव और खेसारी लाल यादव ने सरकार को घेरा है। पांडव कुमार की हत्या पर जीतन राम मांझी ने कहा- ‘इसमें कौन बड़ी बात है भाई। मार दिया तो मार दिया।’ मांझी के इस बयान पर तेजस्वी ने प्रतक्रिया दी। उन्होंने कहा- पांडव कुमार की सिर्फ इसलिए गोली मारकर हत्या कर दी गई क्योंकि वह बिहारी था। देश की राजधानी दिल्ली में जिस जगह बिहारी जानकर गोली मारी गई है, वहां निगम पार्षद, विधायक, सांसद भाजपा के हैं। ‘यही नहीं, सीएम भी भाजपा के हैं, बिहार सीएम भी भाजपा के हैं और आधा दर्जन निष्क्रिय बड़बोले केंद्रीय मंत्री बिहार के, उपराज्यपाल भाजपा के, गृह मंत्री और प्रधानमंत्री भी भाजपा के हैं। भाजपा बिहारियों के लिए काल बन चुकी है।’ चिराग पासवान ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट किया- “नई दिल्ली में खगड़िया निवासी 23 वर्षीय युवक पांडव कुमार की दिल्ली पुलिस द्वारा गोली मारकर हत्या की घटना अत्यंत निंदनीय और चिंताजनक है। यह घटना कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। किसी भी स्थिति में न्यायिक प्रक्रिया से परे इस प्रकार की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं हो सकती।” वहीं खेसारी ने कहा-

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