मेरठ में नीले ड्रम हत्याकांड वाला मकान वीरान पड़ा:लोग गली से गुजरने में डरते, मालिक बोला- 14 महीने से कोई खरीदार नहीं आया

सौरभ की हत्या के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। अब लोग हमारे घर को ‘हत्या वाला मकान’ कहते हैं। हमारी गलती सिर्फ इतनी थी कि हमने सौरभ और मुस्कान को अच्छा परिवार समझकर घर किराए पर दे दिया। ये कहना है मेरठ के ओमपाल का। 3 मार्च 2025 को मुस्कान ने अपने बॉयफ्रेंड साहिल के साथ मिलकर पति सौरभ का मर्डर कर दिया था। शव के टुकड़े कर उन्हें प्लास्टिक के नीले ड्रम में भर दिया था। ऊपर से सीमेंट का घोल डालकर ड्रम को सील कर दिया था। ओमपाल ने बताया सौरभ की हत्या के बाद से मकान 14 महीने से बंद पड़ा है। इससे मुझे काफी नुकसान हो रहा है। पहले इसी किराए से घर का खर्च निकलता था। अब घर पर पुलिस का ताला लगा है। चाबी भी पुलिस के पास ही है। मेन गेट से लेकर अंदर तक सब कुछ सील है। दैनिक भास्कर की टीम ओमपाल के घर पहुंची और उनसे बातचीत की। उन्होंने कहा- लोग मेरा मकान तक देखना पसंद नहीं करते हैं। इस घटना के बाद से हमारी जिंदगी तहस-नहस हो गई है। पढ़िए पूरी बातचीत… यह बातचीत तीन पार्ट में है। पार्ट-1 में मकान मालिक ने हत्याकांड से पहले की बातें बताईं। पार्ट-2 में हत्याकांड से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया। वहीं, पार्ट-3 में हत्याकांड के बाद का अपना दर्द बयां किया। पहली बार गेट पर दिखे मकान मालिक
हम सबसे पहले उसी किराए वाले घर में पहुंचे, जहां सौरभ की हत्या हुई थी। 14 महीनों में पहली बार मकान मालिक ओमपाल घर के बाहर गेट पर कुर्सी पर बैठे नजर आए। आंखों पर काला चश्मा था। शरीर झुका हुआ और बेहद थका दिख रहा था। ऐसा लग रहा था, मानो लंबे समय से बीमार हों। उनके हाथ-पैर कांप रहे थे। हमने पूछा- आप इस मकान के मालिक ओमपाल जी हैं? यह सुनकर वह धीरे-धीरे कुर्सी से उठे और धीमी आवाज में बोले- हां…। बीमारी की वजह से उनका शरीर काफी कमजोर हो चुका था। आवाज भी साफ नहीं निकल पा रही थी। इसके बाद ओमपाल हमें मकान के अंदर लेकर गए। वहां बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। पार्ट-1 पहले मकान किराए पर देने की कहानी
ब्रहमपुरी के इंदिरा नगर में ओमपाल का 200 गज का दो मंजिला मकान है। मकान के एक हिस्से में 75 साल के ओमपाल अपनी 65 साल की पत्नी के साथ रहते हैं। मकान के ऊपरी दो हिस्सों में किराएदार रहते हैं। नीचे बगल वाले पोर्शन में भी किराएदार रहते थे। इसी पोर्शन में बाहर बालकनी, दो बेडरूम, एक किचन और पीछे छोटा आंगन है। मकान के दो रास्ते हैं। एक सामने की तरफ खुलता है, जबकि दूसरा पीछे की गली में। करीब 3 साल पहले ओमपाल ने यही पोर्शन सौरभ और मुस्कान को 6 हजार रुपए महीने किराए पर दिया था। उनके साथ बेटी पीहू भी रहती थी। ओमपाल बताते हैं कि सौरभ बहुत सीधा और सज्जन लड़का लगा। उसी ने मुझसे किराए पर मकान मांगा था। साथ में परिवार भी था, इसलिए हमने मकान दे दिया। बाद में पता चला कि मुस्कान का मायका भी पास में ही है। पड़ोस होने की वजह से हमें और भरोसा हो गया था। किराया और बिल देने में कभी दिक्कत नहीं हुई
ओमपाल बताते हैं कि जब उन्होंने मकान किराए पर दिया था, तब सौरभ भारत में ही रहता था। सौरभ और मुस्कान दोनों अच्छे से रहते थे। बाद में सौरभ नौकरी के लिए लंदन चला गया। इसके बाद मुस्कान अपनी बेटी पीहू के साथ घर में अकेली रहती थी। हर महीने सौरभ लंदन से ऑनलाइन पैसे भेजता था। मुस्कान मुझे किराया नकद देकर जाती थी। बिजली का बिल भी समय पर जमा होता था। किराए को लेकर उन्हें कभी परेशानी नहीं हुई। मुस्कान और सौरभ दोनों अच्छे किराएदार थे। हमें उनसे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। घर में हम दोनों बुजुर्ग ही रहते हैं। बगल में छोटा बच्चा और परिवार रहने से हमें भी अच्छा लगता था। एकलौता बेटा था, वो भी हमें छोड़कर चला गया
ओमपाल ने बताया कि मैं मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला हूं। मेरठ के खंदक बाजार में मेरा कपड़ों का कारोबार था। इसी वजह से हमने यहां घर बना लिया और यहीं बस गए। हमारा एक ही बेटा था। उसकी शादी हो गई थी, लेकिन शादी के दो साल बाद ही वह दुनिया छोड़कर चला गया। उस दिन से हम अधमरे से हो गए। यह कहते हुए ओमपाल भावुक हो गए। बेटे की मौत के बाद बहू की दूसरी शादी करा दी। अपना कारोबार भी बंद कर दिया। इसी मकान के किराए से हमारा गुजारा चलता था। किराएदारों से जो पैसा आता था, उसी से मैं और मेरी पत्नी अपना गुजारा करते थे। भास्कर के सवालों पर मकान मालिक ओमपाल के जवाब पढ़िए सवाल- क्या आपने कभी साहिल को आते देखा था? जवाब- हां, मैंने कई बार साहिल को मुस्कान के घर आते देखा था। शुरुआत में वह सामान देने आता था। खासकर ऑनलाइन ऑर्डर के पार्सल लेकर आता था। पहले वह मेन गेट के बाहर से ही सामान देकर चला जाता था। बाद में घर के अंदर भी आने लगा था। सौरभ बहुत अच्छा लड़का था। हालांकि, मुस्कान का व्यवहार थोड़ा अलग था। वह खाना तक नहीं बनाती थी। अक्सर बाहर से ऑनलाइन खाना मंगाती थी। खुद भी वही खाती और बेटी पीहू को भी खिलाती थी। वह ज्यादातर समय घर में ही बंद रहती थी। पता नहीं क्या करती थी। सवाल- मुस्कान जब नशीली दवा लेने गई थी, तब आप उसके साथ क्यों गए? जवाब- मुझे उस समय कुछ भी पता नहीं था। मुस्कान छोटी बच्ची के साथ रहती थी। उसने मुझसे कहा था कि अंकल जी, मैं बहुत बीमार हूं। दवा लेने जाना है, लेकिन जा नहीं पा रही। मुझे स्कूटी से मेडिकल स्टोर तक ले चलिए। मैं इंसानियत और सामाजिकता के नाते उसकी मदद के लिए चला गया। उसे स्कूटी से मेडिकल स्टोर तक लेकर गया। मैं बाहर स्कूटी पर खड़ा रहा। मुस्कान पर्चा लेकर मेडिकल स्टोर तक गई और दवा लेकर वापस आ गई। मैंने न पर्चा देखा, न दवा देखी। मुझे कैसे पता चलता कि उसने क्या खरीदा था। उसे क्या बीमारी थी, यह भी मुझे नहीं पता था। मैंने उससे कुछ पूछा भी नहीं। सवाल- सौरभ की हत्या के समय आप कहां थे? जवाब- सौरभ पूरे दो साल बाद इंडिया आया था। उसे देखकर हमें भी अच्छा लगा। वह बहुत अच्छा लड़का था। हमने उसके माता-पिता को कभी यहां आते नहीं देखा।हां, मुस्कान के परिवार के लोग कभी-कभार घर आ जाते थे। सौरभ फरवरी 2025 में भारत लौटा था। करीब 1 मार्च के आसपास वह मेरठ आया। इसी दौरान मैं और मेरी पत्नी गांव चले गए। कुछ जरूरी काम था। उस समय घर में सिर्फ किराएदार ही थे। हम 15 मार्च को वापस लौटे। तब मुस्कान और सौरभ वाला पोर्शन बंद मिला। हमने मुस्कान को फोन किया और पूछा- बेटा कहां हो? तब उसने कहा कि वह सौरभ और पीहू बाहर घूमने आएं हैं। हमें लगा कि सौरभ दो साल बाद आया है, इसलिए परिवार घूमने गया होगा। हमें जरा भी अंदाजा नहीं था कि घर के अंदर ड्रम में सौरभ की लाश है। पार्ट-2 अब पढ़िए, जिस दिन इस हत्याकांड का खुलासा हुआ, उस दिन क्या हुआ… सवाल- आपको सौरभ हत्याकांड के बारे में कब पता चला? जवाब- हम गांव से लौट आए थे। इसके बाद 17 मार्च को मुस्कान भी वापस आ गई। वह अकेली थी। हमने उससे पूछा कि सौरभ कहां है? तब उसने कहा- वो आ रहे हैं। इसके बाद हमने ज्यादा कुछ नहीं पूछा। सोचा, किसी की निजी जिंदगी में दखल क्यों दें। उस दिन दोपहर में मैं और मेरी पत्नी घर के अंदर खाना बना रहे थे। तभी बाहर शोर सुनाई दिया। जब बाहर आकर देखा तो दरवाजे पर भीड़ लगी थी। पूरी गली में पुलिस ही पुलिस दिख रही थी। पहले हमें लगा कि आसपास कहीं कुछ हुआ होगा। बाद में पता चला कि घटना हमारे ही घर में हुई है। वह भी सौरभ-मुस्कान वाले पोर्शन में। जब पहली बार हमने यह सुना, तो हमारे होश उड़ गए। हमें पहली बार में यकीन ही नहीं हुआ। तभी हमें पता चला कि सौरभ की हत्या हो गई है। हम पूरी तरह घबरा गए। समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर हमारे घर में यह सब कैसे हो गया। पार्ट-3 अब पढ़िए, हत्याकांड के खुलासे के बाद ओमपाल की जिंदगी कैसे बदल गई… हत्याकांड का जिक्र होते ही ओमपाल कुछ देर के लिए खामोश हो गए। उनकी आंखें भर आईं। भावुक होकर बोले- हमारी गलती सिर्फ इतनी थी कि हमने सौरभ और मुस्कान को एक अच्छा परिवार समझकर अपना मकान किराए पर दे दिया। अगर हमें जरा भी अंदाजा होता कि वो लोग ऐसा कुछ कर सकते हैं, तो हम पहले ही मकान खाली करा लेते। सबकुछ मुस्कान और साहिल ने किया, लेकिन भुगत हम बूढ़े पति-पत्नी रहे हैं। आज पुलिस, कानून और समाज सभी हमें शक की नजर से देखते हैं। लोग ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे हत्या हमने की हो। बीमार हो गए, आंखों की रोशनी चली गई ओमपाल रुंधे गले से अपने आंसू रोकते हुए कहते हैं कि बस किसी तरह खुद को संभालकर यहां बैठा हूं। इस केस ने हमें हर तरह से तोड़ दिया है। हम मानसिक, सामाजिक और आर्थिक हर तरह से बर्बाद हो गए। एक साल में मेरा करीब 25 किलो वजन कम हो गया। अब मैं शुगर, बीपी और हार्ट का मरीज हूं। ज्यादा देर चल भी नहीं पाता। बैठने और उठने में दिक्कत होती है। शरीर बहुत कमजोर हो गया है। मेरी आंखों की रोशनी भी लगभग चली गई है। ऑपरेशन कराया था, लेकिन तनाव की वजह से वह भी सफल नहीं हो पाया। अब ठीक से देख भी नहीं पाता। यह कहते हुए ओमपाल भावुक हो गए। बोले- बुढ़ापे में अब हम पति-पत्नी का शरीर एक लाश की तरह रह गया है, जिसे किसी तरह ढो रहे हैं। रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों ने दूरी बना ली ओमपाल कहते हैं कि इस केस के बाद लोगों ने हमसे नाता तोड़ लिया। रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी सभी ने दूरी बना ली है। गली-मोहल्ले के लोग अब हमसे बात तक नहीं करते। लोग आते-जाते हमें घूरकर देखते हैं, जैसे हत्या हमने की हो। अब रिश्तेदार भी हमारे घर आने से डरते हैं। उनका कहना है कि इस घर पर खौफ का साया है। लोग हमें अपने यहां भी नहीं बुलाते। अगर कोई फोन करता भी है, तो सिर्फ यही पूछता है कि मकान का क्या हुआ या केस कहां तक पहुंचा। इससे ज्यादा कोई बात नहीं करता। कोई ये नहीं पूछता कि हम कैसे रह रहे हैं। अब मकान का कोई खरीददार भी नहीं मिल रहा ओमपाल ने बताया कि इन 14 महीनों में हमें बहुत नुकसान हुआ है। घर पूरे एक साल से बंद पड़ा है। हमने अंदर झांककर तक नहीं देखा। मकान खराब होता जा रहा है, लेकिन हम उसे खोल भी नहीं पा रहे। हमने पुलिसवालों से भी कहा था कि एक बार घर देखने दें। लेकिन उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद ही मकान खोला जाएगा। 14 महीने से किराया नहीं मिला। आगे मिलेगा भी या नहीं, कुछ पता नहीं। लेकिन बिजली का बिल लगातार आ रहा है। हमने मकान बेचने का भी सोचा। कई प्रॉपर्टी डीलरों से बात की, लेकिन कोई ग्राहक यह घर खरीदना नहीं चाहता। बगल वाले पोर्शन में हुई इस घटना की वजह से पूरा 200 गज का मकान बदनाम हो गया। करोड़ों की कीमत वाले घर पर एक दाग लग गया है। अब इस मकान को देखने तक कोई नहीं आता। अब मकान बेचकर गांव जाना चाहते हैं ओमपाल ने कहा कि अब हमारे पास कुछ नहीं बचा। बिना किसी गलती के हमारी इतनी बदनामी हो गई है। लोग हमारे साथ ऐसा व्यवहार करते हैं कि अब यहां रहना मुश्किल लगने लगा है। यहां का एक-एक पल सालों जैसा लगता है। बस अब यही चाहते हैं कि पुलिस और कोर्ट की प्रक्रिया पूरी हो जाए और हमें अपना मकान वापस मिल जाए। अगर मकान मिल गया, तो हम इसे बेचकर अपने गांव हरियाणा लौट जाएंगे। वहीं जिंदगी का बाकी समय बिताना चाहते हैं। आखिर में ओमपाल धीमी आवाज में बोले कि अब इससे ज्यादा हमारी कोई इच्छा नहीं है। …………………… ये खबर भी पढ़िए- युवक का सिर धड़ से अलग होकर सड़क पर गिरा: भतीजे की भी मौत; झांसी में ट्रक ने टक्कर मारी, 100 मीटर घसीटा झांसी में शुक्रवार को बेकाबू ट्रक ने चाचा-भतीजे को रौंद दिया। दोनों बाजार से सब्जी खरीदकर बाइक से घर लौट रहे थे। रास्ते में तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मारी। भागने की कोशिश में ट्रक ने दोनों को करीब 100 मीटर तक घसीटा। इससे चाचा के शव के कई टुकड़े हो गए। सिर धड़ से अलग हो गया। भतीजे का शव भी बुरी हालत में था। पढ़ें पूरी खबर…

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