‘मेरे बच्चे को मेरी झोली में वापस डाल दें’:गोपालगंज के वसीम को दुबई में 10 साल की सजा, वॉर के बीच लिया था फोटो

‘मैं अपने बच्चे को भीख में मांग रही हूं। उससे जो भी नासमझी में गलती हुई है, उसे माफ कर दें और मेरे बच्चे को मेरी झोली में वापस डाल दें।’ ‘राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्र की मोदी सरकार से भी मैं गुहार लगा रही हूं। हाथ जोड़कर माफी मांग रही हूं। किसी भी तरह मेरे बेटे को हमसे मिला दीजिए और वतन वापस ला दीजिए।’ ये कहना है वसीम अकरम की मां शायद खातून का। गोपालगंज के युवक वसीम को दुबई में युद्ध के दौरान उड़ते हेलिकॉप्टर की फोटो लेने के आरोप में गुरुवार 15 मई को 10 साल की कड़ी सजा सुनाई गई है। घटना 6 मार्च की है जब अमेरिका-इजराइल की ईरान से युद्ध में युवक ने उड़ते हेलिकॉप्टर की फोटो ली, जिसके बाद उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इस मामले में दुबई पुलिस ने वसीम को पकड़ा था। युवक पिछले 3 महीनों से दुबई की जेल में बंद है। घटना की जानकारी परिवार वालों को 7 मार्च को मिली। इस खबर के बाद से इंदरवा गांव स्थित वसीम के घर में लोग परेशान रहने लगे। युवक की पहचान सदर प्रखंड स्थित नगर थाने के रफी इंद्रवां गांव के अमिरूल मियां के बेटे वसीम अकरम (36) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। युवक ही पूरे घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, जिस पर 2 छोटे बच्चों सहित पूरे परिवार का भरण-पोषण निर्भर था। नवंबर में उसकी बहन की शादी तय थी, जिसकी तैयारियों और कर्ज चुकाने के लिए वह दुबई कमाने गया था। मामले से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. अब वसीम की मां से जानें पूरी कहानी…. बेटे को 10 साल की सजा मिलने की खबर से बूढ़ी मां शायद खातून की आंखों के आंसू थम नहीं रहे हैं। उन्होंने दुबई और भारत सरकार से बेटे को वापस भारत लाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि, ‘गरीबी और लाचारी के कारण ही मेरा बेटा दुबई गया था, ताकि परिवार की माली हालत सुधर सके।’ मां शायद खातून ने बताया कि, ‘मेरा बेटा दुबई के राशन खेमा में मजदूरी करता था। जुम्मा के दिन नमाज पढ़ने के लिए गया हुआ था। 1 मार्च से पैसे नहीं आ रहे थे, जिससे घर में काफी परेशानी हो रही थी, खाने के लाले पड़ गए थे। जिसके बाद बेटे ने 10000 रुपया भेजने की बात कही थी। ताकि रमजान में बच्चों के लिए कपड़े खरीदने और घर का खर्च के लिए भेजने वाला था।’ ना ही बेटे का फोन आया और ना ही पैसा- पीड़ित की मां वसीम की मां शायद खातून ने बताया, ‘बेटा ने कहा था कि मैं 10000 भेजूंगा लेकिन ना ही उसका फोन आया और ना ही पैसा। मैं मार्केटिंग करने बाजार गई थी और इंतजार कर रही थी की बेटा पैसा भेजेगा तब कुछ सामान खरीद पाऊंगी। बेटा नमाज पढ़ कर निकल रहा था। इसी बीच पहाड़ का सीन देखकर उसे अच्छा लगा उसने फोटो लेकर अपने मोबाइल में रख लिया।’ ‘इसी बीच उड़ते हुए हेलिकॉप्टर का पिछला कुछ हिस्सा कैमरे में कैद हो गया। जिसके बाद जांच कर वहां पुलिस वालों ने उसे पकड़ लिया। वसीम को गुरुवार 15 मई को 10 साल की सजा सुनाई गई फिलहाल उसे जेल में रखा गया है।’ मां शायद खातून ने आगे कहा, दुबई सरकार से हाथ जोड़ कर निवेदन कर रही हूं। बूढ़ी मां अपने बेटे के लिए हाथ जोड़कर माफी मांग रही हूं कि मेरा बेटा को छोड़ दीजिए मेरे बेटे को लौटा दीजिए जो भी गलती हुई हो उसके लिए मैं आप लोगों से माफी मांग रही हूं।
भीख समझ कर मेरे बेटे को मेरे पास वापस भेज दीजिए। आपसे यही विनती है, वसीम ही हमारे पूरे घर का सहारा था। पूरे परिवार का देखभाल करता था परिवार की स्थिति काफी दयनीय हो गई है। परिवार में खाने खाने लाले पड़ गए हैं। छोटे-छोटे बच्चों को लेकर अब मैं कहां जाऊंगी, किसके दरवाजे जाऊं कौन मेरे बच्चे को देखभाल करेगा मेरा कमाऊ बेटा वही था, मैं हार्ट की मरीज हूं। मां शायद खातून ने बताया, ‘मेरा छोटा बेटा वो वसीम के साथ रहता है, लेबर का काम करता था। वो बार-बार एंबेसी जा रहा है लेकिन उसे डांट कर भगा दिया जा रहा है कोई कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं बता रहा है। मुझे इसकी जानकारी तब हुई जब बेटा पैसा नहीं भेजा और ना ही फोन किया तब मुझे कुछ अनहोनी की आशंका हुई। 13 दिन के बाद छोटे वाले बेटे को जानकारी हुई की बड़े भाई को जेल में डाल दिया गया।’ ”बहुत मुसीबत से बच्चा को पाल पोश कर बड़ा किया था” वसीम की मां शायद खातून ने कहा, ‘मेरा बेटा अपने पेट के लिए और हमारे परिवार के लिए भारत से दुबई कमाने गया था। भारत में ही वसीम को काम मिल जाता तो विदेश कभी नहीं जाता। मोदी सरकार से मैं भीख मांग रही हूं कि मेरे दामन में खुदा के वास्ते बेटा को डाल दें। मेरा बेटा हेलिकॉप्टर का फोटो नहीं खींच रहा था, बल्कि पहाड़ अच्छा लग रहा था इस लिए उसने फोटो खींच रहा था लेकिन हेलिकॉप्टर का थोड़ा सा हिस्सा फोटो में आ गया। बहुत मुसीबत से बच्चा को पाल पोश कर बड़ा किया था।’ युवक की पत्नी सलमा खातून ने बताया कि, नमाज पढ़ने जा रहे थे। नमाज पढ़ कर पैसा भेजने की बात कह रहे थे। इसी बीच दुबई पुलिस द्वारा उन्हें पकड़ लिया गया। सरकार से हम हाथ जोड़ कर निवेदन करते हैं कि उनसे जो भी गलती हुई है। उन्हें माफ करें और मेरे शौहर को जितना जल्दी हो सके इंडिया लाया जाए। मोदी सरकार के जितने भी मंत्री है उनसे हाथ जोड़कर कर निवेदन करते है कि मेरे हसबैंड को इंडिया लाया जाए। अंजान देश के सख्त कानूनों से बेखबर युवक को केवल एक फोटो खींचने पर इतनी बड़ी सजा मिलने से स्थानीय लोग भी हैरान हैं। पीड़ित परिवार अब पूरी तरह टूट चुका है और उनके पास कानूनी लड़ाई लड़ने के पैसे भी नहीं हैं। अब इस बेबस परिवार की आखिरी उम्मीद भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन पर टिकी है, ताकि डिप्लोमेटिक लेवल पर बातचीत कर युवक की भारत वापसी कराई जा सके।

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