लुधियाना के दोराहा में 7 साल पहले बच्ची से रेप के बाद उसकी हत्या के मामले में 2 दोषियों को दी गई फांसी की सजा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने दोनों के खिलाफ लुधियाना सेशल कोर्ट में नए सिरे से ट्रायल चलाने के आदेश दिए। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सेशन कोर्ट ट्रायल के दौरान आरोपियों से छोटे और स्पष्ट सवाल पूछे ताकि वे स्पष्ट जवाब दे सकें। हाईकोर्ट ने आगे कहा है कि जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है, उन्हें अपना बचाव करने के लिए पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। ट्रायल के दौरान उनसे लंबे सवाल पूछे गए। सबूतों पर अलग-अलग और स्पष्ट रूप से नहीं पूछा गया। हाईकोर्ट ने माना की ट्रायल के दौरान काफी खामियां रहीं, इसलिए दोनों दोषियों की सजा को रद्द किया जाता है और सेशन में ट्रायल नए सिरे से चलाया जाए। हाईकोर्ट ने यह केस फिर से लुधियाना सेशन कोर्ट को वापस भेज दिया। जिस सात साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या की गई थी, उसे हाईकोर्ट ने लाडली कहकर संबोधित किया। यही नहीं हाईकोर्ट ने जो ऑर्डर लिखा उसमें भी लाडली ही लिखा गया है। अब विस्तार से पूरी कहानी पढ़िए… हाईकोर्ट को मिली ट्रायल कोर्ट की प्रोसिडिंग में खामियां फांसी की सजा मिलने के बाद दोषियों के परिजन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि सेशन कोर्ट में उनकी बात सही से नहीं सुनी गई। उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया। 2023 से लगातार हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सुनवाई के बाद ऑर्डर जारी करते हुए लिखा कि सेशन कोर्ट में 313 CrPC की पूछताछ बेहद लापरवाही से की गई थी। बलात्कार की चोटों, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, DNA मैच, बरामदगी के साक्ष्यों को अलग-अलग, स्पष्ट और छोटे प्रश्नों में नहीं पूछा गया। बच्ची का अपहरण सिर्फ विनोद ने किया था, जबकि केस दोनों पर डाला गया। डीएनए रिपोर्ट पर भी सवाल नहीं पूछे गए। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कोर्ट में कई आदेशों का उल्लेख भी किया। जिसके बाद कोर्ट ने दोनों फांसी की सजा रद्द करने व सेशन कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई करने के आदेश दिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब ट्रायल के दौरान छोटे व स्पष्ट प्रश्न पूछे जाएं। इसके साथ ही ट्रायल जल्दी पूरा करने के आदेश भी दिए हैं।