हाजीपुर स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस में बिना टिकट सफर कराने और बदले में पैसे मांगने का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की टीम ने जब जोगबनी-दानापुर वंदे भारत में यात्रा को लेकर पड़ताल की, तो बातचीत के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। ट्रेन में चढ़ाने से लेकर सीट तय कराने तक का पूरा खेल स्टेशन और कोच के अंदर ही संचालित किया जा रहा था। स्टिंग के दौरान रिपोर्टरों से अलग-अलग रकम की मांग की गई और उन्हें एक एजेंट के पास भेजा गया, जो कथित तौर पर यात्रियों को ट्रेन में बैठाने का काम संभाल रहा था। इस पूरी पड़ताल में यह भी सामने आया कि ट्रेन के अंदर तैनात कोच अटेंडेंट कथित एजेंट की भूमिका निभा रहा था और यात्रियों से होने वाले लेन-देन में उसकी अहम भूमिका थी। वहीं, पूरे मामले में दानापुर मंडल के एक TTE का नाम भी सामने आया है। हाजीपुर स्टेशन पर रिपोर्टरों के साथ क्या बातचीत हुई? कैसे ट्रेन में चढ़ाने के बदले पैसों की डिमांड की गई? एजेंट और कोच अटेंडेंट की क्या भूमिका रही? स्टिंग ऑपरेशन में क्या-क्या सामने आया और पूरे मामले पर रेलवे प्रशासन ने क्या प्रतिक्रिया दी? पढ़िए रिपोर्ट घटना से जुड़ी तस्वीरें… दैनिक भास्कर का रिपोर्टर दानापुर जाने के लिए प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था। तभी वंदे भारत एक्सप्रेस आकर रुकती है। यह ट्रेन जोगबनी से दानापुर के बीच प्रतिदिन चलती है। ट्रेन रुकते ही रिपोर्टर सीधे TTE के पास पहुंचा और वंदे भारत में सफर के लिए बातचीत करने लगा। जानिए रिपोर्टर के सवालों पर TTE के जवाब रिपोर्टर: “दानापुर जाना है… एक्सप्रेस ट्रेन की टिकट है, क्या वंदे भारत में सफर कर सकते हैं?” TTE ने बिना देर किए जवाब दिया “Not Allowed…” कुछ सेकेंड की खामोशी… फिर TTE इधर-उधर नजर घुमाते हैं और धीमी आवाज में कहते हैं TTE: “380 रुपया लगेगा…” रिपोर्टर ने तुरंत कहा: “मुझे टिकट चाहिए।” इस पर TTE का अगला जवाब आया, “टिकट चाहिए तो सीधे डबल लगेगा… साढ़े 750 रुपए।” इसी बीच दूसरा रिपोर्टर आगे बढ़ता है। दूसरा रिपोर्टर: “हम लोग लोकल हैं… दानापुर जाना है, जा सकते हैं?” इस बार TTE की आवाज और सख्त थी, बोले- “नहीं जा सकते!” फिर कुछ पल रुककर वही TTE धीरे से बोलते हैं, “380 रुपए लगेंगे… जाना हो तो वहां खड़े टोपी वाले से बात कर लो।” इसके बाद पहला रिपोर्टर फिर कोशिश करता है रिपोर्टर: “500 ले लीजिए… दोनों लोगों को चढ़ा दीजिए।” लेकिन इस बार TTE ने साफ मना कर दिया। अब रिपोर्टर की टीम उस “टोपी वाले” लड़के के पास पहुंचती है।
पहले उसने कहा टोपी वाला लड़का (एजेंट): “पैसे दे दो… बैठ जाओ…” लेकिन कुछ देर बाद वह भी पीछे हट गया। टोपी वाला लड़का (एजेंट): “जो भी होगा… TTE साहब ही करेंगे।” एजेंटी की मदद से लेन-देन स्टिंग ऑपरेशन में यह भी सामने आया कि जिस बोगी में टीटीई तैनात होता है, उसी बोगी का कोच अटेंडेंट उसका एजेंट बनकर काम करता है। पैसों का लेनदेन मुख्य रूप से अटेंडेंट द्वारा ही किया जाता है। ट्रेन में कौन यात्री चढ़ेगा और किस सीट पर बैठेगा, इसका निर्णय टीटीई का एजेंट ही लेता है। स्टिंग के अनुसार, ट्रेन में तैनात टीटीई की पहचान पीके मिश्रा के रूप में हुई है, जो दानापुर मंडल में कार्यरत हैं। आरोप है कि वह खुलेआम स्टेशन पर बिना टिकट यात्रा कराने के लिए तैयार हो जाते हैं। हालांकि, मांगे गए पैसे न मिलने पर वे यात्रियों को ले जाने से इनकार कर देते हैं। दोषियों पर कार्रवाई होगी पूर्व मध्य रेल हाजीपुर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि यह मामला अभी संज्ञान में नहीं आया है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच पड़ताल के बाद जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।