‘आप भरोसा रखिए, सम्राट जी को प्रचंड बहुमत से जिताइए, मोदी जी सम्राट जी को बड़ा आदमी बनाएंगे।’ 30 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ये बातें मुंगेर के तारापुर में एक चुनावी सभा के दौरान कही थी। 7 महीने बाद अमित शाह ने अपना वादा पूरा कर दिया है। सम्राट चौधरी बिहार के नए CM होंगे। NDA के नेताओं ने उन्हें नीतीश का उत्तराधिकारी चुन लिया है। 15 अप्रैल को दिन के 11 बजे सम्राट CM पद की शपथ लेंगे। 5 पॉइंट में समझिए, 9 साल पहले BJP में शामिल हुए सम्राट चौधरी कैसे और क्यों CM पद तक पहुंचे… 1- BJP के नए OBC लीडर, नीतीश का लव-कुश समीकरण साधेंगे 2014 के बाद से BJP अपना नेता तैयार करने के लिए अलग-अलग चेहरों पर दांव लगा रही थी। तारकिशोर प्रसाद से लेकर नित्यानंद राय तक को आगे किया, लेकिन पार्टी इसमें सफल नहीं रही। अब जब बिहार में NDA के सबसे बड़े ओबीसी नेता नीतीश बिहार की सियासत से दूर जा रहे थे तब पार्टी ने सम्राट चौधरी को CM बनाकर उनका विकल्प तैयार किया है। सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं। नीतीश कुमार कुर्मी हैं। कुशवाहा और कुर्मी को बिहार की सियासत में लव-कुश कहा जाता है। राज्य में कोइरी और कुर्मी समाज की आबादी करीब 7% है। कोइरी 4.21% और कुर्मी 2.87% हैं। इन्हीं के दम पर नीतीश कुमार अपनी राजनीति करते रहे हैं। ऐसे में लव के बाद कुश के हाथ में सत्ता सौंप कर BJP नेतृत्व ने इस वोट बैंक को बिखरने से रोकने की कोशिश की है। BJP और नीतीश दोनों बिहार में एंटी लालू पॉलिटिक्स करते रहे हैं। उनका पूरा फोकस बिहार में गैर यादव OBC को अपने पाले में एकजुट करने का रहा है। इस समीकरण में सम्राट चौधरी बिल्कुल फिट बैठते हैं। कोइरी बिहार में यादव के मुकाबले एक मजबूत पिछड़ी जाति मानी जाती है। सम्राट लगातार लालू यादव के खिलाफ अग्रेसिव तौर पर वोकल रहे हैं। 2- नीतीश की पसंद, BJP के समीकरण में फिट सम्राट चौधरी सीएम बनें, ये नीतीश कुमार भी चाहते थे। इसके सहारे नीतीश अपने वोटर्स को सीधा मैसेज दे गए कि सत्ता अपने परिवार में ट्रांसफर करने की जगह अपनी बिरादरी को ट्रांसफर किया। नीतीश की पसंद होने के साथ ही सम्राट BJP के उस प्रयोग में भी फिट बैठते हैं, जिसमें पार्टी हिंदुत्व और मंडल की राजनीति को एक साथ ला रही है। सम्राट के सियासत की शुरुआत भले संघ और BJP से नहीं हुई हो, लेकिन उनकी पहचान एक हार्डलाइनर नेता की है। अग्रेसिव पॉलिटिक्स करते हैं और पिछड़ी जाति से आते हैं। ऐसे में सम्राट को आगे कर BJP ने अपने दोनों हितों को साधने की कोशिश की है। 3- शाह ने भरोसा किया, पार्टी के हर टास्क को पूरा किया मौजूदा समय में बिहार में PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सबसे भरोसेमंद नेता सम्राट चौधरी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण उनका टास्क मास्टर होना माना जाता है। टॉप लीडरशिप की तरफ से उन्हें जो भी टास्क मिला, उसे पूरा किया। सम्राट के तीन बड़े टास्क से इसे समझिए.. पहला- संगठन को नए सिरे से तैयार किया बिहार में अमित शाह के लिए सबसे टफ टास्क था पार्टी के कॉन्फिडेंस को हाई करना। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को जब पार्टी की कमान मिली तब बिहार BJP को नीतीश कुमार का पिछलग्गू कहा जाता था। पूरी पार्टी पर सुशील मोदी का एकछत्र राज था। इसे खत्म करने के लिए पार्टी ने कभी नित्यानंद राय तो कभी संजय जायसवाल जैसे नेता को कमान दी, लेकिन वे ऐसा करने में सफल नहीं रहे। इसके बाद ये जिम्मेदारी सम्राट चौधरी को दी गई। उन्होंने इसे बखूबी निभाया और बिहार में BJP का संगठन नए सिरे से तैयार किया। दूसरा- लालू-नीतीश पर एक साथ हमले किए नीतीश कुमार ने 2022 में BJP का साथ छोड़ा और महागठबंधन का हिस्सा बन गए। ऐसे में सम्राट चौधरी ने न केवल लालू यादव के भ्रष्टाचार पर हमले किया, बल्कि नीतीश पर भी उसी आक्रामकता के साथ अटैक किए। अभी तक BJP के कोई नेता नीतीश के खिलाफ अग्रेशन नहीं दिखा पाते थे। सम्राट कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं कि उन्होंने केवल पार्टी के निर्देश को फॉलो किया था। 2022 में नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने के प्रण के साथ सम्राट ने मुरैठा बांधा था। 3 जुलाई 2024 को उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी में डुबकी लगाई और मुरेठा सिर से हटा दिया। कहा, ‘अयोध्या नगरी में आकर सरयू नदी में स्नान कर, ये मुरेठा जो मैंने 22-23 महीने से बांध रखा था, अब भगवान राम के चरणों में समर्पित करूंगा।’ सम्राट ने कहा- ‘हमारा कमिटमेंट नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने का था। यह संकल्प 28 जनवरी को पूरा हुआ। महागठबंधन से हटकर वो हमारे साथ आकर मुख्यमंत्री बने। हमने इसका स्वागत किया था। 28 जनवरी को बिहार में एनडीए की सरकार बनी।’ तीसरा- सरकार बनी तो नीतीश कुमार के साथ साए की तरह रहे नीतीश जब NDA में वापस आए तो सम्राट ने उनके साथ नंबर-2 की हैसियत से काम किया। उनके साथ साए की तरह मजबूती से खड़ा रहे। हर फैसले को सराहा। उनकी उपलब्धियां गिनाई। स्थिति ये बनी कि 2005 के बाद नीतीश कुमार ने पहली बार सम्राट के लिए गृह विभाग तक छोड़ दिया। 4-पार्टी से लेकर सरकार चलाने तक का अनुभव सम्राट चौधरी के पास न केवल संगठन बल्कि सरकार चलाने का भी अनुभव है। वह राबड़ी देवी, जीतन राम मांझी और नीतीश सरकार में मंत्री रहे हैं। इनके पास कृषि, पंचायती राज से लेकर वित्त और गृह विभाग में बतौर मंत्री काम करने का अनुभव है। दो बार से लगातार डिप्टी CM हैं। सरकार के साथ-साथ वे विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। वहीं, संगठन की बात करें तो पार्टी के भीतर सचिव, उपाध्यक्ष लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक रह चुके हैं। 5- संघ की ना पर भारी पड़ी शाह की पसंद सम्राट चौधरी ने अपनी राजनीति की शुरुआत RJD से की है। इसके बाद जदयू के रास्ते 2017 में BJP में शामिल हुए। सूत्रों की मानें तो संघ सम्राट के नाम पर राजी नहीं था। संघ की तरफ से संगठन से जुड़े किसी नेता को सीएम बनाने की बात कही गई थी। पार्टी का भी एक धड़ा सम्राट पर आयातित होने का आरोप लगाता रहा है। इन सब पर अमित शाह की पसंद भारी पड़ी।