एआई अपनाना जरूरी, क्योंकि इसके फायदे ज्यादा हैं, साइड इफेक्ट्स कम

शनिवार को हयात रीजेंसी में चल रहे टाईकॉन-2026 का समापन हुआ। दूसरे दिन “द पावर शिफ्ट: महिला फाउंडर्स, जो बिजनेस का भविष्य शेपअप कर रही हैं’ विषय पर पैनल िडस्कशन हुआ। इसमें कोमल शर्मा तलवार, शीनू झावर और डॉ. उमेश नंदिनी जिंदल से नेहा शर्मा ने बात की। कोमल तलवार ने कहा – एआई ने इंफॉर्मेशन, नॉलेज और डेटा एनालिटिक्स तक इंसान की पहुंच को आसान बना दिया है, जिससे बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव आया है। अब किसी मीडिएटर की जरूरत नहीं है। हर बिजनेस को एआई अपनाना चाहिए, ताकि तेजी से ग्रो कर सकें। स्थापित और नए (बडिंग) बिजनेस के स्थिर विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा एआई टूल्स का इस्तेमाल जरूरी है। हालांकि, चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन समय के साथ एआई का उपयोग और बढ़ेगा क्योंकि इसके फायदे साइड इफेक्ट्स से कहीं ज्यादा हैं सेशन “स्टोरी ऑफ अनुराग ठाकुर” को प्रेसिडेंट पुनीत वर्मा ने मॉडरेट किया। अनुराग ठाकुर ने आंत्रप्रिन्योरशिप पर बात की। बोले – किसी अवसर का इंतजार न करें, बल्कि उसे खुद क्रिएट करें। देश में 2,12,000 से ज्यादा डीपीआईआईटी रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और 120 से अधिक यूनिकॉर्न हैं, जो इसे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाते हैं। अब देश दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की दिशा में भरोसे के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम आईटी, इनोवेशन और एआई जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं से वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल सकते हैं। आज 50 प्रतिशत से ज्यादा स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों में रजिस्टर हो रहे हैं। उन्होंने किसी भी बिजनेस या स्टार्टअप के लिए पांच गोल्डन रूल्स बताए। पहला – लोकल सोचो, लेकिन स्केल ग्लोबली करो। दूसरा – नेटवर्क ही नेटवर्थ है। तीसरा – डिजिटल पर महारत हासिल करें, वरना वह आप पर हावी हो जाएगा। चौथा – लचीलापन ही आपका असली प्रोडक्ट है। पांचवां – जैसे-जैसे आप आगे बढ़ें, वैसे-वैसे समाज को भी कुछ लौटाएं। अवसर का इंतजार न करो, बल्कि क्रिएट करो… आईटी और एआई में तेजी से बदलाव शीनू झावर ने कहा – आईटी और एआई के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, जिन पर नजर रखना आसान नहीं। अब तकनीक किसी एक फील्ड तक सीमित नहीं है और नॉलेज इकोनॉमी तक पहुंच हर बिजनेस के लिए जरूरी है। वहीं डॉ. जिंदल ने कहा – हेल्थ सेक्टर में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और यह बेहतर सेवाएं देने में सहयोगी साबित होगा। हालांकि, डेटा सेफ्टी, नैतिकता और कस्टमर सुरक्षा जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। जीरो बजट से 1500 करोड़ का ब्रांड “स्क्रैच से 1500 करोड़ का ब्रांड बिल्ड करने” पर गुजरात के बिपिनभाई हडवानी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा – सिर्फ 12वीं तक पढ़ा। तब पिता के साथ दुकान पर बैठता था। 13 साल की उम्र में नमकीन और मिठाई बनाना सीख लिया था शुरुआत जीरो बजट से की और गांव-गांव जाकर प्रोडक्ट बेचे। तीन भाइयों में सबसे छोटा मैं हूं। और मैंने बिजनेस को बढ़ाने के लिए शहर से बाहर जाने का फैसला किया। पिता ने शुरू में रोका। मैंने जिद की तो उन्होंने 4500 रुपये दिए। तब मैं अपने चचेरे भाई के साथ शहर आया और नमकीन बनानी शुरू की। शुरुआती मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी। क्वालिटी प्रोडक्ट और बेहतर सर्विस के दम पर ही कस्टमर्स का भरोसा जीता। कभी अपने प्रोडक्ट की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। इस तरह गोपाल स्नैक्स ब्रांड तैयार हुआ। _photocaption_आंत्रप्रिन्योरशिप एक क्लासिक सफर है….*photocaption* पूर्व मिस इंडिया व स्टार्टअप एस्ट्रो श्योर.एआई की फाउंडर वान्या मिश्रा ने कहा – स्टार्टअप एक प्रोसेस है, जो धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। इसमें आंत्रप्रिन्योरशिप एक तरह का क्लासिक सफर है। मैं किसी बिजनेस बैकग्राउंड से नहीं हूं बल्कि फैमिली मेंे दूसरी फील्ड के लोग हैं इसलिए ग्रेजुएशन पर जोर दिया और इंजीनियर बनी। नौकरी के बाद सोच में बदलाव आया। पिछले पांच साल में स्पिरिचुअैलिटी और टेक्नोलॉजी को लेकर नजरिया बदला। यह जरूरी नहीं कि आप जिंदगी में जीतें या फिर हारें बल्कि जरूरी है कि बार-बार प्रूव करते रहो। क्योंकि काफी सारे मौके आते जाते रहते हैं। आखिर में सब्जेक्टिविटी मायने रखती है, जो जीत पर समाप्त होती है। काफी लोगों के मन में यह धारणा रहती है कि जो एक्टिंग है वह बिजनेस नहीं कर सकता। मुझे भी कई लोग कहते हैं आप तो एक्टिंग में है, मिस इंडिया है इसकी क्या जरूरत है। लेकिन मैंने हार नहीं मानी, बिजनेस में भी खुद साबित किया।

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